Thursday, June 16, 2011

तीसरा अध्याय :कर्मयोग


कर्मयोग -अहमीयते अमल 

अर्जुन ने कहा - 
बता मुझको जब्बार गेसूदराज -अमल से अगर इल्म है सरफराज . 
तो रक्खा नहीं मुझको आजाद क्यों -मुझे कुश्तो खूँ का है इरशाद क्यों .II 1 II 
बजाहिर नहीं बात सुलझी हुई -मेरी अक्ल है इस से उलझी हुई . 
मुझे बात कतई बता दीजिये -भलाई की रह पर चला दीजिये .II 2 II 
भगवान ने फरमाया
सुन अय मेरे मासूम अर्जुन जरा -दिए रास्ते मैंने दोनों बता . 
है ज्ञान उनका रस्ता जो ग्यानी हैं लोग -जो योगी हैं ,उनका है कर्मयोग .II 3 II 
कि इंसां कभी तरके आमाल से -रिहा हो न कर्मों के जंजाल से . 
फकत तर्के आमल से है मुहाल -कि हासिल किसी को ओजे कमाल .II 4 II 
जहां में न देखोगे तुम एक पल -कि कोई भी फारिग है और बेअमल . 
सभी काम करने पे मामूर हैं -गुणों ही की ही फितरत से मजबूर हैं .II 5 II 
जो अश्या से रोके कवाये अमल -मगर दिल से खाहिश न जाये निकल . 
जो अश्या की उल्फत में सरशार हैं -परागंदा दिल हैं ,वो मक्कार हैं .II 6 II 
मगर ले कवाये -अमल से जो काम -करे मन से पहिले हवास अपने राम . 
लगावत न उसको समर का ख्याल -तो है कर्मयोगी वही बा कमाल .II 7 II 
जो है फर्ज तेरा कर उस पर अमल -कि तर्के अमल से है बेहतर अमल . 
अमल छोड़ देने हों तुझको तमाम -तो मुश्किल है तेरे बदन का कयाम .II 8 II 
अमल जिस कदर भी है यग के सिवा -वो दुनियां को बंधन में रक्खें सदा . 
किये जा तू सब काम यग जानकर -लगावत न रख ,और न फल पे नजर .II 9 II 
जो खालिक ने इंसां को पैदा किया -तो यग को भी पैदा किया और कहा .
कि फूलो फलो ,रख के यग पे यकीन -मुरादों कि ये गाय है कामधीन.Ii 10 II
नवाजा करो यग से तुम देवता -तुम्हें देवता भी नवाजें सदा .
जो इक दूसरे को करे साजमंद -तो हासिल हो तुमको मुकामे बुलंद .II11 II
यागों से नवाजे हुए देवता -तुम्हें नेमतें सब करेंगे अता .
मगर लेके नेमत जो देता नहीं -समझ लो कि वो चोर है बिल्यकीं.II 12 II 
निकूकार खाएं जो यग का बचा -गुनाहों से करते हैं खुद को रिहा . 
जो थाली खुद अपनी ही खातिर पकाएं -तो अपने ही पापों का भोजन वो खाएं .II 13 II 
है जिन्दों का गल्ले पे दारोमदार -तो गल्ले का बारिश पे है इन्हिसार . 
हो बारिश ,जो यग का करें एहतमाम -मगर यग्ग हों कर्मों से पैदा तमाम .II14 II 
सभी कर्म हों ब्रह्म से रूनुमा -करे ब्रह्म को रूनुमा लाफना . 
सो वो ब्रह्म दुनिया पे छाया हुआ -है यग के अमल में समाया हुआ .II15 II
इसी तरह दुनिया का चलता है दौर -जो इस दौर से हट के के राह और . 
वो खाहिश का बन्दा गुनाहगार है -हयात उसकी दुनिया में बेकार है .II 16 II 
मगर आत्मा से है जिसको लगन -फकत आत्मा में रहे जो मगन . 
सदा आत्मा ही से खुरसंद है -कहाँ फिर वो कर्मो का पाबंद है .II 17 II 
न कुछ उसको अफआल से फायदा -न कुछ तर्के आमाल से फायदा . 
न दिल बस्तगी है जहाँ से उसे -न कुछ मुद्दआ ईं ओ आं से उसे .II 18 II 
रहो इसलिए तुम लगावट से दूर -बजा लाओ फर्ज अपने सब बिल्जरूर . 
इसी से मिलेगा मुकामे बुलंद -लगावट न रक्खो अमल में पसंद.Ii 19 II 
अमल से बुजुर्गों ने पाया कमाल -जनक जैसे इन्सां हुए बा मिसाल . 
इसी तरह नेकी किये जाओ तुम -जहां को भलाई दिए जाओ तुम .II 20 II 
कोई नामवर शख्श करता है काम -तो करते हैं तकलीद उसकी अवाम . 
बड़ा आदमी जो बनाये उसूल -वही सारी दुनिया करेगी कबूल.II 21 II 
मुझे देख ,दुनिया को देना है कुछ -न तीनों जहानों से लेना है कुछ . 
कमी कुछ नहीं ,गो मुझे रीनाहार -मगर फिर भी रहता हूँ मसरुफे कार .II 22 II 
करूं जो न अनथक लगातार काम -तो रुक जाएँ दुनिया के धंदे तमाम . 
चलें लोग मेरी रविश पर सभी -करें काम वो भी न अर्जुन कभी .II 23 II 
जो तर्के अमल मैं करूँ इख्तियार -उजड़ जाए दुनिया ए नापायदार . 
तो वर्णों का मेरे सबब घालमेल -बिगड़ जाये लोगों की हस्ती का खेल .II 24 II 
हो दाना की जैसे अमल में लगन -उन्हें काम ही की लगन है ,लगन .
हों वैसे ही नादां के निष्काम काम -रहे ताकि लोगों में कायम निजाम .II 25 II 
अगर मूरखों में अमल की हो जोश -मजबजब न उनको करें अहले होश.
करें योग में रह के खुद कारोबार -यही उनको रखे मसरूफे कार .II 26 II 
ये दुनिया की रौनक ,कामों की धुन -सबब इनका असली है फितरत के गुन.
मगर जिनके दिल में अहंकार है -समझता है खुद को की मुख़्तार है. II 27 II 
जबरदस्त अर्जुन !हो जिस पर अयाँ-गुनों और कर्मों का राजे निहां .
रहे बे तआल्लुक ,कि दुनिया के काम -गुनों पर गुनों के अमल का है नाम .II 28 II 
वो मूरख जो माया के धोखे में आये -गुनों और अफआल से दिल लगाये .
वो जाहिल है ,और अक्ल में खामकार-न दुविधा में डालें उन्हें होशियार .II 29 II 
तू मन अपना परआत्मा में लगा -खुदी औ हवस छोड़ मत जी जला .
मुझे सौंप दे काम सब बेदिरंग -उठ अर्जुन !उठ अर्जुन !हो मसरुफे जंग .II 30 II 
जो हैं मेरी तालीम पर कारबन्द-करें नुक्ताचीनी को नापसंद . 
अकीदत से पाबन्दे इरशाद हैं -वो कर्मों के बंधन से आजाद हैं .II 31 II 
जो आमिल नहीं मेरी तलकीन पर -जो तकरार ओ हुज्जत करें बेश्तर. 
उलूम उनके हैं सब फरेबो फितूर -वो जाहिल तबाही में जाएँ जरुर .II32 II
कोई इल्म से लाख पुरनूर है -मगर अपनी फितरत से मजबूर है . 
बशर अपनी फितरत बदलता नहीं -यहाँ जब्र से काम चलता नहीं .II33 II
कभी दिल को रगबत हो महसूस से -कभी दिल को नफ़रत हो महसूस से . 
ये रहजन हैं दौनों ,न मरगूब हो -तू गलबे से इनके न मरगूब हो .II 34 II 
न ले गैर का धर्म ,गो खूब है -किधर्म अपना नाकिस भी मरगूब है . 
जो मरना पड़े ,धर्म अपने पे मर -तुझे गैर के धर्म में है खतर.II 35 II 
अर्जुन का सवाल - 
फिर अर्जुन ने पूछा
 कि वो कुव्वत है क्या -करे जिस से इन्सां गुनाहों खता . 
खता कोई करता नहीं चाह से -वो सब कुछ करे जबरो इकराह से.II 36 II 
भगवान का इरशाद -
सुना ये तो भगवान बोले कि बस -गजबनाक दुश्मन है तेरी हवस .
समझ ये राजोगुन की औलाद है -ये लोभी है ,पापी है ,जल्लाद है.II 37 II 
धुंआ रूए आतिश को जैसे छुपाये -रूए शीशा पर जिस तरह जंग आये .
छुपे पेट में माँ के जैसे जनीं -हवस छुपे से ज्ञान तेरा यहीं .II 38 II 
है सब ज्ञान वालों की दुश्मन हवस -ये पीछा न छोड़ेगी दुश्मन हवस .
हवस आग ऐसी है ,कुंती के लाल -कि इस आग का सैर करना मुहाल.II 39 II 
हवासो - दिलो -अक्ल ए नेकनाम -हवस के लिए हैं ये तीनों मुकाम .
यहीं ज्ञान इन्सां का रूपोश हो -यहीं तन का वासी भी मदहोश हो .II 40 II 
इसी वास्ते ,अर्जुन अय हक़ शनास-तू कर अपने काबू में अपने हवास.
हवास को फ़ना कर ,कि है ये गुनाह -करेगी यही इल्मो इरफां तबाह .II 41 II 
हवास आदमी के हैं आला तमाम -मगर उनसे ऊंचा है मन का मुकाम .
है मन से बड़ा मरतबा अक्ल का -मगर अक्ल से बढ़ के है आतमा.II 42 II 
समझ आत्मा अक्ल से है बुलंद -बना नफस को रूह का पायबंद .
हवास है तेरी दुश्मने खौफनाक -जबरदस्त अर्जुन इसे कर हलाक.II 43 II 
      तीसरा अध्याय समाप्त -











3 comments:

  1. गीता सरल पढ़ने वाले सभी विद्वान् और धर्म प्रेमी महानुभावों से निवेदन है ,कि अनुवाद की लय (काफिया -तुक )और छंद को बनाये रखने के लिए उर्दू के कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है ,जो लोगों को कठिन या अपरिचित प्रतीत होंगे .इसलिए अंतिम अध्याय के बाद एक 'उर्दू -हिंदी गीता शब्दकोश "भी देने का विचार है .चूंकि हरेक अध्याय के साथ अर्थ देने से समय अधिक लग रहा था.और मैं गीता सरल को जल्द ही पूरा करना चाहता हूँ .आप असुविधा के लिए क्षमा करें .यह गीता उर्दू -हिंदी शब्दकोश सबके लिए उपयोगी होगा .मेरी टाइप करने की स्पीइड कम है और एक एक उर्दू शब्द को कई बार सही लिखना भी मुश्किल हो जाता है..फिर भी मैं उर्दू के शब्दों को सही लिखने कि कोशिश कर रहा हूँ .
    शब्दकोश में इसके बारे में और जानकारी दी जायेगी .

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